Monday, January 23, 2017

जौनपुर 366 सदर विधानसभा का चुनावी अध्यन व् विश्लेषण ।आदि गंगा गोमती के गोद में बसा शहर जौनपुर जिसका इतिहास के पन्नों में भारत की राजधानी के रूप में उल्लेख किया गया है ।ज्यादा इतिहास में न जाते हुए वर्तमान की बात करते है और आप लोगों को कुछ आंकड़ों के माध्यम से यहाँ की वर्तमान राजनितिक परिदृश्य को रखने का प्रयास करता हूँ।जौनपुर में 9 विधानसभा और 2 लोकसभा (जौनपुर,मछलीशहर)है ।

                   2012 विधानसभा चुनाव में एक -एक सीट बीजेपी और कांग्रेस को और बाकि समाजवादी पार्टी को मिली थी ।जौनपुर 366 सदर विधान सभा कांग्रेस के खाते में गयी थी जिसको कांग्रेस के नदीम जावेद ने अपने प्रतिद्वंदी तेजबहादुर मौर्या (पप्पू)को  1239 वोटों से पराजित करते हुए 50863 लोगों का दिल जीता था ।2012 में मुलायम और अखिलेश यादव का बोलबाला माना जा रहा था पर सदर विधान सभा में हवा ऐसी बही की कांग्रेस को विजयश्री मिली।
जौनपुर सदर विधानसभा में पिछले कई वर्षों से एक खास धर्म के लोग ही विधायक चुने जाते है जिसमे बीजेपी के सुरेंद्र प्रताप सिंह एक अपवाद रहे जो 2002 में विजय श्री प्राप्त कर सके ।


अब  हम आपको 2012 सदर 366 विधानसभा चुनाव के कुछ खास आंकड़े प्रस्तुत करता हूँ।


प्रत्याशी                   प्राप्तमत                मतप्रतिशत  
नदीम जावेद (कांग्रेस)  50,863                     25.5  
तेज बहादुर मौर्य(बसपा) 49,624                   24.8
जावेद अंसारी (सपा)     47,724                    23.9
सुरेंद्र प्रताप सिंह(बीजेपी) 30,948                   15.5
अब हम बूथ के आंकड़े देखते है ।जीते हुए प्रत्याशी का 
जीते हुए बूथ   मजबूत बूथ   औसत बूथ  कमजोर बूथ  
  122               33                 105           225
कुल मतों की संख्या है 4,32,192 जिसमें महिला और पुरुषों के उम्र के हिसाब से आंकड़ा इस प्रकार है।


वर्षों       18-24     25-34     35-44     45-54    55-64


पुरुष -41,199    77,535    49,812  34,998  20,159
           9.5%      17.9%     11.5%    8.1%     4.1%


महिला-26,824  58,254  43,111    31,892  18,439

            6.2%     13.5%   10%       7.4%      4%
अगर कुल महिला और पुरुषों की संख्या देखी जाय तो इस प्रकार होगा -
महिला -1,93,768 
पुरुष-   2,38,404 


कुछ मतदाता न पुरुष है न ही महिला जिनकी संख्या न के बराबर है ।जाती और धर्म आधारित आंकड़ा प्रस्तुत नहीं किया जा रहा है क्योंकि चुनाव आयोग और सुप्रीमकोर्ट की ऐसी ही मंशा है ।उत्तर प्रदेश का चुनाव हो और जाती धर्म की बात न हो ये बड़ा ही मुश्किल है पर कोशिश जारी है ।


पिछले चुनावों में जाती के आधार पर आंकड़े प्रस्तुत किये जाते रहे है, जिसमें समाजवादी पार्टी के खाते में यादव और मुस्लिम वोटों को देखा जाता रहा है, खासकर उत्तर प्रदेश में। जिसे M Y फैक्टर भी कहा जाता था पर वो तब की बात है जब समाजवादी पार्टी के मुखिया और राष्टीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव हुआ करते थे, पर आज समाजवादी पार्टी के मुखिया और अध्यक्ष अखिलेश यादव है ।अखिलेश यादव अपनी पुरानी परंपरा से ऊपर उठकर विकास की बात करने की बात कह रहे है ।वही दलित वोट मायावती यानि बहुजन समाज पार्टी के माने जाते रहे है जबकि कांग्रेस में ब्राह्मण स्वर्ण और कुछ मुश्लिम वोटों को गिना जाता रहा है ।जबसे बीजेपी के खेवन हार मोदी जी हुए है ,तब से बीजेपी के वोटों में बड़ी बढत देखि गयी है जिसमें स्वर्ण,अन्य पिछड़े,जाटव वोट माना जाता रहा है ।
पिछले 2012 विधानसभा और 2014 लोकसभा को ध्यान में रखकर बात करे तो जौनपुर की जनता कुछ हदतक पारंपरिक वोटों को धता बताते हुए विकास को तरजीह देते हुए देखि गयी है जिसमें युवावों का अहम् योगदान रहा है ।2012 में 366 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नदीम जावेद ने विकास की बात करते हुए अनेक वादे किए थे जिसे उस समय में क्षेत्र के युवावों ने सराखों पर रखते हुए उन्हें विधायक बना दिया था।बताते है कि नदीम के चुनाव में 15-40 वर्ष के युवावों ने कमान सम्हाल रखी थी ,जिनके पीछे नदीम ने पानी की तरह पैसे उड़ाये थे ।200-300 गाड़िया प्रति दिन प्रचार के लिए निकलती थी ।रहने के लिए होटल और खाने पीने की पूरी व्यवस्था होती थी ,उसीका नतीजा था कि कांग्रेस के पारंपरिक 5 हजार वोट को 50 हजार में बदल दिया गया ।2014 लोकसभा चुनाव में जौनपुर की जनता ने पूरे देश की तरह मोदी जी की विकासवादी आंधी में बह गयी थी ,जिसमें जिले से दो युवा चेहरों को चुन कर देश की संसद में पंहुचा दिया (कृष्ण प्रताप सिंह जौनपुर )(रामचरित्रनिषादमछलीशहर)।

2017 जौनपुर 366 सदर विधानसभा के लिए वैसे तो अभी सभी पार्टियों के उम्मीदवार मैदान में नहीं आए है पर तस्वीर मतदाताओं के सामने जरूर दिखाई देने लगी है ।समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के गठबंधन के बाद जहा ज्यादा लोगों का मानना है कि ये सीट कांग्रेस के लिए समाजवादी पार्टी छोड़ देगी, वही मन ही मन कांग्रेसी और खुद नदीम जावेद अखिलेश यादव और राहुल गांधी को शुक्रिया अदा कर रहे है ।पिछले 2 सालों से लगातार तन मन धन से मेहनत कर रहे समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को जोर का झटका लगा है ।कहा जाता है कि जावेद सिद्दीकी ने अभी तक करोड़ों रूपये खर्च दिए है जिसमें गाड़ियों का काफिला ,पार्टी कार्यालय का खर्चा और पार्टी का चंदा रहा है।ऐसे में देखने की बात होगी की जावेद सिद्दीकी 2 साल मेहनत करने के बाद क्या ये सीट नदीम जावेद को गिफ्ट में दे देते है या निर्दल चुनाव मैदान में उतरकर ताल से ताल बजाते है ।बीजेपी अभी भी इस ताक में बैठी है कि सपा कांग्रेस गठबंधन से कौन उतरता है फिर जाकर वो अपना पत्ता खोले ।

2017 उत्तर प्रदेश चुनाव जहा अखिलेश यादव और नरेंद्र मोदी के इज्जत का सवाल बनता जा रहा है वही 2019 के लोकसभा चुनाव का सेमीफाइनल भी माना जा रहा है ।जहाँ केंद्र की भाजपा सरकार मोदी के अगुवाई में विधानसभा चुनाव में विकास मॉडल पेश करती हुई दिखाई दे रही है जिसमें शौचालय ,गैस सिलेंडर ,स्वच्छ भारत ,डिज़िटल इंडिया,नोटबंदी को लेकर जा रही है ।वही बीजेपी पार्टी व् उसकी सहयोगी आरएसएस और अन्य हिन्दू पार्टिया धर्म को मुद्दा बनाने में परहेज करती नहीं दिखाई दे रही है ।अखिलेश यादव एक्सप्रेस वे ,मेट्रो,पुलिस 100,महिला हेल्प लाइनऔर एम्बुलेंस को लेकर मैदान में दिखाई दे रहे है ।जिनके साथ कांग्रेस का धब्बा भी साथ- साथ है ।
2017 के चुनाव में धर्म आधार न बना तो समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को पूर्ण बहुमत मिलने के आसार वही धर्म आधार बना तो बीजेपी होगी प्रदेश की पहली पसंद ।

Tuesday, January 17, 2017

उल्लू न बनाओ नेता जी ..







उत्तर प्रदेश 2017 विधान सभा चुनाव आते ही एक बार फिर नेता जी और राजनितिक पार्टियां अपना अपना चाल चलना शुरू दी है ।पिछले कई महीनों से समाजवादी पार्टी की पारिवारिक कलह जनता और चुनाव आयोग के सामने थी ,जिसमे बाप बेटे की बीच दंगल चल रहा था । एन मौके पर यानि नामांकन से ठीक पहले दंगल का परिणाम आया और योद्धा अखिलेश बेटा जी घोषित हुए ।पूरी की पूरी सायकिल और पार्टी की कमान मिल गयी ।पार्टी कार्यकर्ता जो इधर उधर या शांत थे उनको एन मौके पर चार्ज कर दिया गया ।पिता जी यानि मुलायम सिंह यादव जी भी बेटे के अनुसार चलने को तैयार हो गए जो पिछले दिनों बेटे को कोसते फिर रहे थे ,चाचा जी भी चुनाव में साथ दिखने लगेंगे ये पक्का है क्योंकि स्क्रिप्ट ही ऐसी लिखी गयी थी ।
बात कांग्रेस की करें तो 27 साल यूपी बेहाल का नारा लेकर घूमने वाली पार्टी अब उन्ही 27 साल का बखान करते दिखेगी ,क्योकि गठबंधन में रहना है तो अखिलेश बाबा की जय कहना है।उत्तर प्रदेश में अपनी जमीन खो चुकी कांग्रेस पिछले साल से ही अपनी ताकत आजमाइस करती दिख रही थी कभी खटिया लेकर तो कभी 27 साल यूपी बेहाल का नारा लेकर पर आखिर में औकात का पता चल गया कि प्रशांत किशोर हो या पप्पू राहुल कोई भी दहाई का आंकड़ा पार नहीं करवा सकता ।साइकील के कैरियर पर बैठ कर अपनी नैया पार करने की जुगत में है कांग्रेसी ।
मायावती जी की बात करें तो, वैसे वो दलित चिंतक है पर चुनाव के समय मुस्लिम और स्वर्ण चिंतक बन जाती है ।मायावती जी अपने उम्मीदवारों की लिस्ट में मुस्लिम और स्वर्ण कार्ड को तरजीह दी है ।अब उन्हें दलितों के चिंता नहीं होगी क्योकि अगर दलितों टिकेट देती तो सीट तो जाती ही ऊपर से कोई और दलित नेता उनके टक्कर में आ जाता ।वैसे भी ईंट पत्थर से उत्तरप्रदेश की जनता अभी उबर नहीं पायी है तो इस बार माहौल तो ठंडा ही रहने वाला है ।
मोदी जाप करने वाली पार्टी भी अब राम मंदिर ,परिवार वाद ,तोड़ जोड़ और धर्म की बात करने से गुरेज नहीं कर रही है ।कुछ भी हो उत्तरप्रदेश में अस्तित्व तो बनाना ही पड़ेगा क्योंकि हमेशा कांग्रेस के प्रति जनता में गुस्सा थोड़ी न रहेगा कि लोकसभा फतह कर लेंगे और लोकसभा फ़तह करना है तो उत्तर प्रदेश को अपना बनाना होगा जरिया चाहे जो भी हो ।

उत्तर प्रदेश जहाँ बच्चा बड़ा होकर पहले मैथ ,इंग्लिश और साइंस नहीं पड़ता बल्कि राजनीति शास्त्र जरूर पड़ता है वो भी स्कूल से नहीं घर से लेकर चौक चौराहों पर ।ऐसे जनता को समाजवादी नेता पारिवारिक दंगल दिखा कर, कांग्रेस के पारंपरिक वोटों को मिलाकर राज सिंहासन चाहते है पर जनता उन दिनों को कैसे भूल जायेगी जो नेता जी (मुलायम) ने अखिलेश के लिए कहा कि अखिलेश मुस्लिम विरोधी हो गए है ,कांग्रेस चिल्ला चिल्ला कर कह रही थी कि अखिलेश राज नहीं माफिया राज है यूपी की जनता बेहाल है ।मायावती का मुस्लिम कार्ड और स्वर्ण प्रेम दलित वोटरों को कितना भायेगा ये तो समय बतायेगा ।सभी पार्टियों के निशाने पर चल रही भाजपा क्या अपने तोड़ जोड़ और धर्म कार्ड को लेकर अपनी नैया पार कर पायेगी जबकि नोटबंदी की मुसीबत और कालाधन का एक भी रूपये जनता के हाथ नहीं लगा हो तो क्या मोदी जाप मोदी राज कर पायेगा ये तो आने वाला मार्च का महीना ही बताएगा ।





Sunday, April 13, 2014

जौनपुर 73 ............2014.

  • पञ्च नदियों के बीच आदि गंगा गोमती की गोद में





  1. विराजमान जौनपुर ,जिसकी गंगा जमुनी तहजीब भारत वर्ष को प्रभावित करती है।सई गोमती बसुइ बरना पीली पाँचों नदियाँ जौनपुर के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।मुग़ल साम्राज्य में जौनपुर अपनी अलग पहचान रखता था।जौनपुर में वो मुग़ल साम्राज्य का बना शाही किला,अटाला मस्जिद ,पुल और कई मकबरे है जो जौनपुर को ऐतेहासिक जिला होने का दर्ज़ा दिलाते है समय को देखते हुए मूड चेंज करते है और कूद जाते है चुनाव के महापर्व में जहाँ अखाड़े भी है पहलवान भी और उनके प्रसंसक भी ।जौनपुर में कुल4500000 मनुष्य निवास करते है जिसमें 1662127 मददाता है, पुरुष 896528है और महिला संख्या 765599 है (आंकड़ा 2009)।जौनपुर की एरिया की बात करें तो वो 4.000 स्कोयर किलो मीटर है,जिनमे 300 स्कूल और 200 कॉलेज है,जहाँ की 73% लोग शिक्षित है जिनमें पुरुष 86% और महिलाएं62% शिक्षित है ।मैं जाती की बात नहीं करना चाहता पर मज़बूरी है यह लेख अधूरा  रह जायेगा ।जौनपुर में 250000 ब्राह्मण ,248000 क्षत्रिय ,265000 यादव,263000 अनुसूचित जाति व् जनजाति ,190000 मुसलमान,138000वैश्य और अन्य मददाता है। जौनपुर लोकसभा सीट से प्रथम संसद सदस्य स्वर्गीय श्री वीरबल सिंह थे जिन्होंने कांग्रेस से 1952 में अपने। प्रतिद्वंदी स्वर्गीय बलदेव को 67000  वोटों से हराया था। उसके बाद ये पर्व अपने रूप रेखा को बढ़ाते हुए अपने प्रसंसकों की भी संख्या में इजाफ़ा करता चला गया जिसमें हिन्दू मुसलमान दोनों ने विजय श्री को गले लगाया ।अगर मैं एक एक करके नाम लूँगा तो पंद्रह नाम लेने पड़ेंगे जिसको मैं जरूरी नहीं समझता। पिछले लोकसभा चुनाव में एक कमी जो रह रही थी वो भी पूरी हो गयी कि बहुजन समाजपार्टी का भी खाता खोल दिया और धनञ्जय सिंह सांसद बन गए। जौनपुर ने कभी किसी को निरास नहीं किया लगभग सभी मुख्य पार्टियों कांग्रेस,भाजपा,समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को मौका दिया वर्तमान में जौनपुर उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में पिछड़ा जिला कहा जाता है जहाँ मूलभूत सुबिधाओं का टोटा है ।जौनपुर की जनता चुनाव में हमेशा एक आस लगाये बैठी रहती है कि कोई तो विकास करेगा,जिसके उपरांत जौनपुर की जनता ने एक या दो ऐसे सांसद पाए जो विकास को गति देना चाहते थे ,जिसमें अग्रणी नाम श्री कमला सिंह जी जो कांग्रेस के सीट पर चुनाव जीते थे कमला सिंह जी ने शहर से 8किलो मीटर दूर एक कताई मिल को लाने का काम किया ,जिसमें क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध हुए जो पिछले वर्ष बंद हो गयी उसके बाद उन्होंने शहर से 30 किलो मीटर दूर शाहगंज में चीनी मिल का निर्माण करवाया ,गावों में ट्यूबेल और शिचाई के लिए नहरों का जाल बिछानें का कार्य किया ।दूसरे विकास पुरुष का ख्याल करें तो स्वर्गीय श्री अर्जुन सिंह यादव जी थे जिन्होनें शहर से 10किलोमीटर दूर अपनें निवास गाँव कुकड़ी पुर में अपनी जमीन देकर बिश्वबिद्यालय का निर्माण कार्य करवाया ।वर्तमान सांसद श्री धनञ्जय सिंह जी है जिनका नाम भारतीय मीडिया में कुछ दिन पहलें सुर्ख़ियों में था  ,सांसद पर बलात्कार और नौकरानी की हत्या करने का आरोप है ।न्यायलय नें वेळ पर हिरासत से छुटकारा दे दिया है जो अपनें चुनाव क्षेत्र जौनपुर में एक बार फिर से उन साथियों सहयोगियों से मिल रहें है जिन्होंने उन्हें रिकार्ड मत 100000 से अधिक से विजय श्री दिलायी थी ।धनञ्जय सिंह 2009 में 302618 मत पाए थे ,जोअपने प्रतिद्वंदी समाजवादी पार्टी के पारस नाथ  यादव को पटखनी दी थी ।बात करें वर्तमान में मोदी लहर की तो पुरे देश में दिख रही है ,जिसके मुंह से सुनों मोदी जाप करते सुनायी देगा। "हर हर मोदी घर घर मोदी "अबकी बार मोदी सरकार"ये नारा खूब चला है ।जौनपुर से मोदी ने कृष्णा प्रताप सिंह को अपना सैनिक चुना है ,जिन्हें जौनपुर की 80%  जनता कहती है मैं जनता ही नहीं ।जिस वंशवाद को बीजेपी अपना ढाल बनाती है कांग्रेस के लिए उसी वंशवाद के प्रतिक है के पी सिंह जी ,जो अपने स्वर्गीय पिता श्री उमानाथ सिंह जी के सुपुत्र है,एक लॉ कॉलेज के प्रबंधक भी है। जिन्हें क्षत्रिय वोटों का 100%  ब्राह्मणों का 40%और यूथ का 80% बनियों का 90%भरोसा है।भरोसा है अच्छी बात है पर बहुजन समाज पार्टी के शुभाष पांडे जी क्या भरोसा नहीं कर सकते और कर भी रहें है अनुसूचित जाति का 100% ब्राह्मणों का 60% मुसलमानों का 60%और अन्य का 20%।भोजपुरी महानायक अभिनेता से नेता और नेता से जौनपुर का बेटा बनें रविकिशन शुक्ल जी भी बड़ी उम्मीदें पाल् रखें है,उनका मानना है की मुझे सभी धर्म और जाती ,बड़े और छोटे ,पुरुष और महिलाएं 100% वोट देंगे। बात समाजवादी पार्टी की तो वो तो विकास की गंगा बहा रहें है लैपटॉप और बेरोजगारी भत्ता देकर तो उनका मानना है कि बेरोजगार 90% ,क्षत्राएँ 70%, नए वोटर क्योंकि लैपटॉप जो दिया है जिसपर समाजवादी का नाम जो आता है 90%और हमारे यादव  भाई मुसलमान भाई 100% जीतेंगे 150000 वोटों से। खेल रोमांचक बनाने के लिए पूर्व सासंद और दबंग माफिया एक महिला (वर्तमान में राष्ट्रीय अध्यक्ष )के कपड़े से विख्यात उमाकांत यादव जो जो कहते है सभी "सभी पार्टियों में दलदल है सबसे अच्छा निर्दल है"चुनाव से पहले ही 100% जीत चुके है। अब बात कर लेते है एक ऐसी पार्टी की जो कहती है हम ही साफ पाक है बाकि सब चोर सत्ता में आएंगे तो सबको जेल भेज देंगे। जब डॉ कैलास प्रकाश यादव जी को समाजवादी पार्टी ने ठेंगा दिखा दिया तो आम आदमी पार्टी से आ गए ,मेहनत के बल पर डॉक्टर साहब कहते है हम दिल्ली में जैसे जीते थे वैसे यहाँ भी जीतेंगे।इस महा पर्व में लड़ायी टक्कर की होने जा रही  है जिसमें मुसलमान और ब्राह्मण महत्वपूर्ण भूमिका में है और इंतजार में भी की कौन के पी सिंह को पटखनी दे सकता है ,अब पूछेंगे क्यों तो बता दूं पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी से सीमा दुबे जो लगातार 3बार से विधायक है उन्हें  टिकट दिया था जिनका क्षत्रिय मतदाताओं ने साथ न देकर बसपा में वोटिंग कर दी थी और मुसलमान तो बीजेपी को हरानें के लिए हमेशा तैयार बैठा रहता है।दूसरी तरफ मोदी लहर है जो जात पात से ऊपर उठकर कुछ जरूर लाभ लेता दिख रहा है ।ऐसे में धनञ्जय सिंह की भूमिका महत्त्वपूर्ण है अगर पुराने दम ख़म से चुनाव लड़े तो के पी को हारने की संभावना प्रबल होगी,चुनाव सुभाष पांडे और रविकिशन के पाले में चला जायेगा।16की सायं काल  का इंतजार करते हुए आपसे विदा लेता हूँ।@आशुतोष मिश्र @

माटी के लाल: सिराजे हिन्द जौनपुर और मेरी यादें...........

माटी के लाल: सिरजे हिन्द जौनपुर और मेरी यादें...........

Wednesday, April 9, 2014

सिरजे हिन्द जौनपुर और मेरी यादें...........

सिराजे हिन्द जौनपुर का नाम इतिहास के पन्नों  में स्वर्णिम अक्षरों में आलेखित है।कभी मुग़ल साम्राज्य में राजधानी रहा कभी ऋषि मुनियों का केंद्र जौनपुर ।अपने कुछ बतों के लिए आज भी विश्व प्रसिद्ध है चाहे वो मुली हो चाहे मक्का और इत्रा ,आज भी लोग इन वस्तुओं को पसंद करते हैं।कहने को जौनपुर एक छोटा शहर है  लेकिन अगर देखें तो क्षेत्रफल के मामले में जौनपुर एक बड़े जिले के रूप में जाना जाता है। जिसमें नौ विधानसभा और दो लोकसभा सदस्य चुने जाते है।शिक्षा के मामले में जौनपुर का अपना एक इतिहास है ,जिसमें आइएस पिसिएस की भरमार है।प्रदेश में जब कोई नौकरी या किसी भी प्रकार की मेरिट बनती है तो जौनपुर का नाम ऊपर ही रहता है ।लेकिन एक बुनियादी सवाल उठता है कि जौनपुर जब इतना संम्पन्न है तो यहाँ मूलभूत सुबिधायें क्यों नहीं हैं ।रोड का हाल देखें तो लगता है कि जैसे यह रोड आदमियों के लिए नहीं जानवरों के लिए बनाया गया हो ।घर से साबुन सैम्पू तेल परफ्यूम लगाकर निकलते है लोग लेकिन घर वापस आने पर भूत जैसे या कह सकते है जानवर हो जाते है ।पेट पलने के लिए लोगों को दिल्ली मुंबई का चक्कर लगाना पड़ता है,जहा वो अपने जीवन अस्तर को गिराकर अपना पेट पालते है। दिल्ली मुंबई जाने के लिए भी कोई खास सुबिधा नहीं है ।रेलवे की लाइन तो है लेकिन रेल की संख्या नहीं,जो है भी उनके टिकट नहीं  "चाहिए तो दलालों को तीन गुना दाम दीजिये"।थाने और कचहरी का तो ऐसा हाल है कि बयां करना अपने मानव जाति को गाली देनें जैसा है। थानेदार साहब के यहाँ आम जनता तो पहुँच नहीं सकती बिना दलालों के या कहें बिना पैसे के और कचहरी का भी यही हाल

है। बड़ी ख़ुशी हुई थी जब मेरे घर के बगल में एक यूनिवर्सिटी का शिलान्यास हुआ था मै बहुत छोटा था मोती लाल बोरा उस  समय गवर्नर थे उन्हीं के करकमलों द्वारा फीता कटा तो लगा की अब मेरा जौनपुर बदलेगा ।लेकिन हुआ क्या बिना पैसे के आप अन्दर भी नहीं जा सकते "घुस दो काम हो जायेगा "लगभग जितने भी कुलपति आये उनके अंत में भ्रस्ताचार का दाग चिपक गया ।
जौनपुर में बात राजनीति की करें तो बच्चे को पैदा होते ही शिक्षा दी जाने लगती  है राजनीति की जो बड़ा होकर किसी न किसी तरह से राजनितिक पार्टियों का सदस्य बन ही जाता है,कुछ दिन उपरांत कुछ लोग अपना भला बुरा समझते हुए सन्यास लेकर मेरी तरह अपना कैरियर बनाने के फ़िराक में पड़ जाते है ,कुछ उसी राजनीति से अपना दाल रोटी चलाते रहते है।चुनाव का समय आता है सभी छोट भइये नेता कुरता टाईट करके उम्मीदवारों के साथ हो लेते है ,जहाँ उन्हें चलने के लिए लग्जरी गाड़ी उपलब्ध हो जाती है और जेब में कुछ हरी पीली पत्तियाँ बस लगे रहो लगे रहो भैया जी की जय हो करते रहेंगे ।एक नेता जी माननीय सांसद या माननीय विधायक हो जायेंगे और अपना दिल्ली या लखनऊ में आवास बनवा लेगें उनके रिश्तेदार सगे सम्बन्धी ठेकेदार और बिल्डर हो जायेंगे ,बाकि छोट भैये नेता दलाली करने लगेंगे बाकि आम जनता फिर से धुल और मिटटी में लग जाएगी।
कुछ दिन पूर्व लोकसभा का चुनाव है मैदान में कई पहलवान ताल ठोक रहे है जिसमें भारतीय जनता पार्टी के नए नवेले के पी सिंह ,कांग्रेस से भोजपुरी अभिनेता रविकिशन शुक्ल ,बहुजन से सुभाष पांडे ,समाजवादी से पारसनाथ यादव ,नयी नवेली पार्टी जिसका नाम आम आदमी पार्टी से पुराने समाजवादी डॉ के पी यादव और कुछ दबंग मफिया जैसे पूर्व सांसद उमाकांत यादव मैदान में है।
मेरे भी मन में माहौल देखकर एक तरंग उठ रही है कि मै भी इस अखाड़े का करीब से मौजूद होकर नैन रस लूं ।पर मजबूर हूँ ,कर्मभूमि में जो कर्म का भार है उसे निभाने की जो जिम्मेदारी ले रख्खी है।@आशुतोष मिश्र 

Saturday, November 10, 2012

भाजपा का दोहरा चरित्र

राम नाम की लूट है लूट  सको सो   लूट, अंत काल पछताओगे जब प्राण जायेगा छूट। इसी सिद्धांत पर  चल रही भाजपा अब मुश्किलों  में दिखाई पड़ रही है। कभी राम नाम के बल पर अपनी राजनीति ज़माने वाली भाजपा आज अपने ही लोगों के निशाने पर खड़ी है। हिन्दू धर्म में राम को भगवान् के रूप में पूजा जाता है। जिसे लेकर भाजपा के व्योब्रिद्ध नेता सांसद और कानून के जानकार श्री रामजेठमलानी ने दो टूक शब्दों में कहा की राम तो एक बुरे पति थे। जो अपने ही पत्नी को एक धोबी के  कहने पर जंगल में छोड़ दिए थे। रामजेठमलानी के आलावा भाजपा के एक और सांसद( राम जन्म भूमि) से विनय कटियार ने इस व्यक्तव्य पर सहमती जताई। जिसके  बाद पूरे भारतीय राजनीति में भूचाल सा आ गया है।  भाजपा के लोग कुछ कहने से कतराने लगे है जबकि और विपक्षी पार्टियां  हमलें से नहीं चुकीं रही है ।


 हिन्दू धर्म की चीर फाड़ कोई नयी बात नहीं है कभी रामचरितमानस जलाये गए तो कभी हिन्दू धर्म के आस्था के प्रतिक  भगवान् श्री राम को गलियां दी गयी। कभी देवी देवताओं को गलियां दी गयी। लेकिन हिन्दू धर्म के प्रति लोगों की आस्था में कमी कभी नहीं देखी गयी। कमी तो आज देखी  जा रही है भाजपा के सिद्धांतों में जो कभी राम को ढाल बनाकर राजनीति में आये आज वही राम को ही बुरा बता रहे हैं। भाजपा का ये दोहरा चरित्र कोई नया नहीं इसके पहले भी भाजपा का दोहरा चरित्र देश के सामने आ चूका है।जब सत्ता से दूर थे तो राम मंदिर बनाने की बात करते थे और जब सत्ता में आ गए तो राम का नाम भी भूल गए। कभी भ्रष्टाचार को लेकर लगातार सरकार पर हमलें करने  वाली भाजपा जिसने इसी मुद्दे को लेकर देश का करोड़ों रूपया (संसद न चलने पर )बरबाद करने में भूमिका निभाई। जब खुद भ्रष्टाचार के दलदल में फ़सी (नितिन गडकरी के फर्जी कंपनी के मामले में ) तो भ्रष्टाचार का मुद्दा ही भूल गयी। भाजपा के लोग कई बार कहते ही नहीं थकते की मनमोहन सिंह बृद्ध हो चुके है। अब उन्हें गद्दी छोड़ देना चाहिए। जब आडवानी की बात होती है तो उन्ही लोगो को आडवानी नौजवान दिखाई देने लगते है। लेखक किसी भी पार्टी का नहीं है। 

Tuesday, November 6, 2012

क्या होगा देश का कैसे चलेगा देश ?




                   

भारतीय  राजनीति  एक चिंता का विषय बनती जा रही है कि क्या होगा देश का ?, कौन चलाएगा देश?, कैसे   चलेगा देश। इन सब सवालों के बीच एक बड़ा  प्रश्न उठ रहा है की जिस व्यक्ति के ऊपर पूरे देश की निगाहें  टिकी हुई है जिससे पूरे देश को उम्मीदें है वो अपनी घर की  सरकार  तो चला नहीं पाया जिसकी धर्मपत्नी आज भी अकेले जीवन  यापन कर रही है !तो  क्या उम्मीद लगाया जाय की  देश की सरकार चलाने में वो( नरेन्द्र मोदी ) सक्षम हो  सकते  हैं !भले  ही गुजरात की  लगातार बागडोर हाथ  में रही   हो पर संदेह   कायम है !  वर्तमान तो किसी से  छुपा  नहीं है, आज की मनमोहन सरकार जनता की निगाहों में भ्रष्ट  ,लाचार  और निकम्मी सरकार  बन कर रह गयी है !जिसमें घोटाला अपराध आम सी बात  हो गयी है !मंहगाई अपने चरम पर  है गरीब -गरीब होता जा रहा है अमीरों का बोलबाला है वो जैसा चाहते है सरकारें   भी वैसा ही कर रही है!अब बात अगर हम कांग्रेस और भाजपा की करें तो दोनों ही पार्टियों में कोई ऐसा चेहरा सामने नहीं आ रहा की जो देश को देश की जनता को एक  साफसुथरी सरकार  दे सकें !राहुल गाँधी एक चेहरा था कांग्रेस के लिए, देश के लिए जो अभी राजनीती में  बार -बार   बच्चा साबित होते है !कांग्रेस की सरकार आए 8 साल हो गएँ और राहुल गाँधी जी को भी आयें ,लगभग हो गए 8 साल,पर अभी भी उनको लगता है की अभी कुछ करने के लिए समय मिलना चाहिए ! क्या  भारत की जनता अरविन्द केजरीवाल जैसे  पर विश्वास करें? जो आये दिन सनसनी फैलाकर  नाम कमाना  चाहते है !जिनका छोटा सा दल आई ए सी कोई आकार लेने से पहले ही कई भागों में विभाजित हो गया !तो क्या  होगा विश्व के सबसे  बड़े  लोकतंत्र का ???